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योगासनों का ग्रंथि संस्थान पर प्रभाव

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    योग आसनों का ग्रंथि संस्थान पर प्रभाव 1. आसन और प्राणायाम क्या है। २. यकृत को सक्रिय करने वाले आसन। ३. स्प्लीन को सक्रिय करने वाले आसन। ४.अग्न्याशय( pancreas) को सक्रिय करने वाले आसन ५. किडनी को सक्रिय करने वाले आसन। ६. पौरूष ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन। ७. नलिका विहीन घंटियां क्या है। ८.पिट्यूटरी ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन। ९. थायराइड ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन। १०. पैरा थायराइड ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन। ११. थाइमस ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन। १२. पेनक्रियाज ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन। १३. एड्रिनल ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन। १४. गोनाड ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन।       प्रिय साथियों आज आज हम बात करेंगे कि योगासनों में  हमारे ग्रंथि संस्थानों में कैसे और कौन-कौन से प्रभाव पड़ते हैं आज हम उसके बारे में बताएंगे.           वास्तव में किसी व्यक्ति के शरीर मन तथा बुद्धि का उचित रूप से विकास होने पर ही उसे पूर्ण स्वस्थ कहा जा सकता है वर्तमान युग में बच्चों का शारीरिक विकास उचित ...

आसन

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  प्रिय साथियों आज हम आसन के बारे में जानेंगे आसन के स्वरूप इस के भिन्न-भिन्न प्रकार संधान प्रयोग तैयारी के बारे में जाना है जैसा कि आप जानते हैं कि चाहे बात अष्टांग योग की हो या हठयोग की दोनों में ही आसन को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है वास्ता आसनों से हमारे अंदर शुद्धता एवं स्थिरता का विकास होता है अताउल शारीरिक एवं मानसिक रूप से सुखी होने के बाद पर योग साधक के लिए यह भी आवश्यक है कि वह साधना के लिए लंबे समय तक स्थिरता के साथ एक आसन में बैठ सकें जिससे कि उसकी साधना में प्रगति और सके अन्यथा उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में बाधा उपस्थित होती है इसलिए महर्षि पतंजलि ने कहा है।           " स्थिरसुखमांसनस्"  सूत्र २/४६                                                            अर्थात         स्थल था पूर्वक एवं सुख पूर्वक एक विशेष शारीरिक स्थिति में बैठने का नाम ह...