योगासनों का ग्रंथि संस्थान पर प्रभाव

    योग आसनों का ग्रंथि संस्थान पर प्रभाव
1. आसन और प्राणायाम क्या है।
२. यकृत को सक्रिय करने वाले आसन।
३. स्प्लीन को सक्रिय करने वाले आसन।
४.अग्न्याशय( pancreas) को सक्रिय करने वाले आसन
५. किडनी को सक्रिय करने वाले आसन।
६. पौरूष ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन।
७. नलिका विहीन घंटियां क्या है।
८.पिट्यूटरी ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन।
९. थायराइड ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन।
१०. पैरा थायराइड ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन।
११. थाइमस ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन।
१२. पेनक्रियाज ग्लैंड को सक्रिय करने वाले आसन।
१३. एड्रिनल ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन।
१४. गोनाड ग्रंथि को सक्रिय करने वाले आसन।

      प्रिय साथियों आज आज हम बात करेंगे कि योगासनों में  हमारे ग्रंथि संस्थानों में कैसे और कौन-कौन से प्रभाव पड़ते हैं आज हम उसके बारे में बताएंगे.
          वास्तव में किसी व्यक्ति के शरीर मन तथा बुद्धि का उचित रूप से विकास होने पर ही उसे पूर्ण स्वस्थ कहा जा सकता है वर्तमान युग में बच्चों का शारीरिक विकास उचित समय पर उचित रूप से नहीं हो रहा है एक ही परिवार के बच्चों में कोई लंबा हो जाता है तो कोई पिंगा रह जाता है और कोई मोटा हो जाता है तो कोई बहुत दुबला पतला रह जाता है इसी प्रकार युवा अवस्था के लक्षण शीघ्र प्रकट हो जाते हैं तो किसी पर विलंब से जबकि सभी बच्चे एक ही रसोई घर का बना एक जैसा भोजन करते हैं कुछ युवक युवावस्था में ही वृद्ध वृद्ध से जान पड़ते हैं और कुछ वृद्ध अवस्था में भी युवा दिखाई देते हैं l
  इसका मुख्य कारण बच्चों के शरीर में स्थित है भिन्न-भिन्न प्रकार के ग्रंथियों का अनियंत्रित सक्रिय या निष्क्रिय होना होता है यह ग्रंथियां विभिन्न प्रकार के रसस्राव छोड़ती है जो शारीरिक मानसिक व बौद्धिक विकास में सहायक होती हैं इन ग्रंथियों को नियंत्रित करने के लिए बयान या योगासन अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं ।
एक्साइज क्या है ?
व्यायाम शब्द का पर्यायवाची शब्द एक्सरसाइज है ।दोनों का अर्थ विकसित करना, प्रयत्न, करना उद्योग करना तथा पुन:पुन:अभ्यास करना है व्यायाम में गति एवं झटके को प्रमुखता दी जाती है। एक ही क्रिया को बार-बार दोहराना पड़ता है जैसे दंड बैठक, पीटी, भरो तोलन, डंबल घुमाना मुगदर, घुमाना तथा नाना प्रकार के खेलकूद आदि।
योग आसन क्या है ? 
योग अभ्यास में योगासन का शब्द का अर्थ स्थिति स्थिति पोस्टर है जिसमें गति एवं झटके का कोई स्थान नहीं है यद्यपि एक निश्चित स्थिति में आने के लिए प्रारंभ तथा अंत में प्रयत्न  करना पड़ता है परंतु कुछ समय तक स्थिति को बनाए रखने जाने से यह गया व्यायाम है।
 व्यायाम में श्वास-प्रश्वास, हृदय गति तथा रक्तचाप बढ़ जाता है परंतुपरंतु आसनों में परंतु आसनों में सभी क्रियाएं विश्वात्मक अवस्था में करने से आरंभ में रक्तचाप बढ़ कर दूसरे क्षण से ही घटने लगता है। यदि अवस्था स्वास्थ एवं हृदय गति से भी रहती है।
व्यायाम मैं स्नायु के टूटने से शरीर में लैक्टिक एसिड तथा कार्बन-डाइऑक्साइड संचित होकर थकान आने लगती है ।जबकि योगासनों के उपरांत शरीर हल्का होकर इस पूर्ति युक्त तथा मन शांत हो जाता है क्योंकि आसनों में स्नायु शक्ति अधिक व्यय नहीं होती है।
व्यायाम मुख्यत:  वॉलंटरी मसल्स अर्थात हाथ पैर की पेशियों को मजबूत बनाती हैं इनसे कुछ पेशियों तो बहुत विकसित हो जाती है परंतु बाकी पेशियां पर्याप्त रक्त के अभाव में दुर्बल हो जाती हैं यही कारण है कि अच्छे खिलाड़ी एवं पहलवान भी पेट संबंधी विकारों से ग्रस्त रहते हैं प्रायः आसनों का प्रभाव अधिकतर अनैच्छिक पेशियों अनवर एंट्री मसल्स पर होता है इनसे पाचन तंत्र स्वसन तंत्र उत्सर्जन तंत्र अंतः स्रावी ग्रंथियां विशेष रूप से लाभान्वित होती हैं।
योगासनों का शरीर पर प्रभाव 
योगासनों से जोड़ों के स्नायु वंदन (Ligaments), धमनिया (Arteries) ,शिराएं ( Veins), एवं मांसपेशियों (Muscles) लचीली बनने से वृद्ध अवस्था में भी उनकी लचक बनी रहती है यही कारण है कि आसनों का अभ्यास वृद्धावस्था तक किया जा सकता है।

                           नलिका युक्त ग्रंथियां 
     नलिका युक्त ग्रंथियों में यकृत (लीवर), तिल्ली (स्प्लीन),
अग्न्याशय (पैंक्रियाज),वृक्क ( किडनी) एवं पौरूष ग्रंथियां (पेस्टीज/ओवरीज) आती हैं ।

लीवर को  Active करने वाले आसन 
 छाती के दाएं और नीचे स्थित होता है यह भोजन का पोषक तत्व सोचकर रक्त में मिलाता है रक्त शर्करा तत्व पृथक करके जमा रखता है तथा भोजन के प्रोटीन और अमीनो एसिड को तोड़कर एकत्रित करता है इसके अलावा रक्त संचार में घूमने वाले हानिकारक तत्वों को हानि रहित बनाता है लीवर में लोहा एवं ताम्र आदि अनेक प्रकार के खनिज लवण एवं मृनल विटामिन एकत्र रहते हैं जो रक्त में लालकण बनाते हैं लीवर को सक्रिय करने वाले प्रमुख आसन निम्नलिखित हैं   १.र्वांगासन

 २.हलासन
 ३.शलभासन
 ४.नाभि आसन
 ५.पश्चिमोत्तानासन
 ६.मयूरासन
 ७.उडिड्या बंधासन
८.मंडूकासन
९.उदर चालासन
१०.कपालभाति आदि
  अग्न्याशय को सक्रिय करने वाले आसन

  Spleen केेे नीचे पैंक्रियाज रहता है इसका लीवर एवं रक््त से संबंध है ।रक््त में विशेष प्रकार की श


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आसन